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क्या होता है शनि का पाया? शुभ-अशुभ शनि का पाया और इसके प्रभाव हिंदी में
What is Shani Paaya and its Effects in Hindi om swami gagan

शनि पाया और इसके प्रभाव क्या हैं?


16 May 2018
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पाया या मूर्तिनिर्णय गोचर में ग्रहो के अनुसार फलकथन करने के लिए एक विशेष विधि है | किसी भी व्यक्ति की जन्म राशि से शनि जिस भी भाव में गोचर कर रहा होता है| उसके अनुसार शनि के पाया अर्थात मूर्तिनिर्णय के फल का विचार किया जाता है| मूर्तियां चार प्रकार की होती है (1) स्वर्ण (2) रजत (3) ताम्र (4) लोह | इनमें स्वर्ण मूर्ति सबसे अधिक शुभ होती है और घटते हुए क्रम के अनुसार लोह मूर्ति सबसे कम शुभ मानी जाती है |

शनि के साथ-साथ यह भी अवश्य विचार करे की उसे समय गोचर में चन्द्रमा किस राशि में स्थित है |

स्वर्ण मूर्ति - जब शनि गोचर में किसी व्यक्ति की जन्म राशि से 1, 6, 11 भाव में भ्रमण करते है तो शनि के पाये स्वर्ण के माने जाते है| यह जातक के लिए अत्यधिक शुभ एवं स्वर्णिम परिणाम देने वाला होता है |

रजत मूर्तिजब शनि गोचर में किसी व्यक्ति की जन्म राशि से 2, 5, 9 भाव में भ्रमण करते है तो शनि के पाद रजत के माने जाते है| यह जातक को जीवन में आगे बढ़ने के अच्छे अवसर प्रदान करता है |

ताम्र मूर्तिजब शनि गोचर में किसी व्यक्ति की जन्म राशि से 3, 7, 10 भाव में भ्रमण करते है तो शनि के पाये  ताम्र के माने जाते है| यह जातक को मध्यम होकर मिश्रित फल प्रदान करता है |

लोह मूर्तिजब शनि गोचर में किसी व्यक्ति की जन्म राशि से 4, 8, 12 भाव में भ्रमण करते है तो शनि के पाये लोह के माने जाते है| यह जातक को परेशानियां और समस्याएं देता है |

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