Contact - +91-9773506528


सोमनाथ मंदिर भुवनेश्वर की सम्पूर्ण जानकारी, रहस्य, विशेषता और कैसे पहुंचे?
Significance of Somnath Temple om swami gagan

सोमनाथ मंदिर की विशेषता


20 April 2018
Share

सोमनाथ मंदिर

सोमनाथ मंदिर गुजरात के पश्चिमी तट पर सौराष्ट्र क्षेत्र के वेरावल शहर में समुंद्र किनारे स्थित है। यह सबसे प्राचीन हिंदू मंदिर है। इस जगह को पहले प्रभासक्षेत्र के नाम से जाना जाता था। सोमनाथ मंदिर की गणना बारह ज्योतिर्लिंगों में से सबसे पहले ज्योतिलिंग के रूप में होती है।

 

सोमनाथ मंदिर के बारे में

सोमनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से सबसे पहला ज्योतिर्लिंग है। ज्योतिर्लिंग उन स्थानों को कहते है जहाँ भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए थे। सोमनाथ मंदिर विश्व प्रसिद्ध धार्मिक तीर्थस्थान और पर्यटन स्थल है। हिंदू धर्म में इस स्थान को बहुत पवित्र माना जाता है। इस मंदिर का निर्माण स्वयं चन्द्र देव ने करवाया था। इस मंदिर का इतिहास हिंदू धर्म के उत्थान और पतन का प्रतीक माना गया है। अब तक यह मंदिर कई बार नष्ट हो चुका है और दूबारा उतनी ही विशालता से इसका पुननिर्माण किया गया।  

 

सोमनाथ मंदिर का विशेषता

इस मंदिर की विशेषता है कि अब तक यह 17 बार नष्ट हो चुका है और हर बार इसका पुननिर्माण किया गया। महमूद गजनवी से लेकर अलाऊद्दीन खिलजी तक सबने इस मंदिर को ध्वस्त किया। भारत के स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने इस मंदिर का पुननिर्माण करवाया।

यह मंदिर गर्भगृह, सभामंडप और नृत्यमंडप- तीन प्रमुख भागों में विभाजित है। इस मंदिर का शिखर 150 फुट ऊंचा है। इसके शिखर पर स्थित कलश का भार दस टन है और इसकी ध्वजा 27 फुट ऊंची है।   

इस वास्तु अनुकूलता के कारण यह मन्दिर भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है और साथ ही मंदिर में पर्याप्त धन का आगमन होता रहा है। इसलिए बार-बार ध्वस्त होने के बाद भी हर बार यह मन्दिर बनता रहा।

सोमनाथ मन्दिर के आसपास दो महत्वपूर्ण हिन्दू धार्मिक स्थल है। जिस कारण से इस क्षेत्र का ओर भी महत्व बढ़ जाता है। मन्दिर से पांच किमी. की दूरी पर भालका तीर्थ है, लोक कथाओं के अनुसार यहीं पर श्रीकृष्ण ने देहत्यागा था और एक किलोमीटर दूर तीन नदियों हिरण, कपिला और सरस्वती का महासंगम होता है। त्रिवेणी नदी में धार्मिक दृष्टि से स्नान का बहुत महत्व है, क्योंकि इसी त्रिवेणी पर श्रीकृष्ण जी की नश्वर देह का अग्नि संस्कार किया गया था।   

ऐसा माना जाता है की भगवान कृष्णा की सिमंतक मनी सोमनाथ मंदिर के शिवलिंग में स्थापित है।

 

सोमनाथ मंदिर कैसे पहुँचे ?

सोमनाथ मंदिर आप सडक, रेल और हवाई मार्गों द्वारा आराम से पहुँच सकते है। सोमनाथ आने के लिए यात्रियों को साधन के लिए कोई परेशानी नहीं होती है।

हवाई जहाज

सोमनाथ आने के लिए सबसे नजदीक एयरपोर्ट केशोद है जो सोमनाथ मंदिर से 55 किमी. दूर है। एयरपोर्ट से बाहर निकलने पर बस और टैक्सी की सेवाएं उपलब्ध है।

रेल द्वारा

सोमनाथ मंदिर के सबसे पास वेरावल रेलवे स्टेशन है, जो यहाँ से मात्र सात किमी. की दूरी पर स्थित है। यहाँ से गुजरात और अहमदाबाद के लिए सीधे साधन उपलब्ध है।

सडक द्वारा

सडक द्वारा सोमनाथ से वेरावल 7 किमी. , अहमदाबाद से 400 किमी. और जूनागढ से 85 किमी. दूर है। सोमनाथ मंदिर से पूरे राज्य के लिए बस सेवा उपलब्ध है।

 

सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना

यह मंदिर रोज सुबह 6 बजे से लेकर रात के 9 बजे तक भक्तो के लिए खुला रहता है। इस मंदिर में रोज तीन बार आरती होती है। सुबह 7 बजे, दोपहर 12 बजे और शाम को 7 बजे आरती होती है।

इस मंदिर में होमात्मक अतिरुद्र, होमात्मक महारुद्र, होमात्मक लघुरुद्र, सवालक्ष सम्पुट महामृत्युंजय जाप आदि का किया जाता है।

divider

For any queries, reach out to us by clicking here
or call us at: +91-9773506528



Connect with Swami Ji

If you want to consult Swami Gagan related to your Horoscope, Marriage & Relationship Matters or if you are facing any kind of problem, then send your query here to book an Appointment or call on this number +91-9773506528