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महा मृतुंजय मंन्त्र का जाप कब और कैसे करे और क्या लाभ होते हैं जाप से?
Mahamrityunjaya Mantra and its Benefits om swami gagan

महामृत्युंजय मंत्र और इसके फायदे


05 February 2018
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महामृत्युंजय मंत्र ऋग्वेद से लिया गया एक श्लोक है। यह महान मंत्र ऋग्वेद में शिव को मृत्युंजय के रूप में समर्पित किया गया है। शास्त्रों और पुराणों में भी रोगों से मुक्ति और अकाल मृत्यु से बचने के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने का विशेष उल्लेख मिलता है , जैसे रोग, दुर्घटना, अनिष्ट ग्रहों के प्रभावों को दूर करना और मौत को टालने के लिए सवा लाख महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने का विधान है। इस मंत्र का जाप करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव को प्रसन्न करने का मंत्र है।

 

महामृत्युंजय मंत्र का लाभ

बीमारी या अकाल मौत के डर को दूर करने के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया जाता है।

इस मंत्र का जाप करने से शरीर की खोई हुई ऊर्जा को पुनर्जीवित कर लिया जाता है।

हिन्दू धर्म में इस मंत्र को प्राण रक्षक और महामोक्ष मंत्र कहा जाता है।

इस मंत्र का जाप करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

जो व्यक्ति रोज़ महामृत्युंजय मंत्र का जाप करता है, वह अच्छा स्वास्थ्य, धन, समृद्धि और लम्बी उम्र को प्राप्त करता है।

किसी भी व्यक्ति की कुंडली में किसी भी तरह का दोष होता है, तो उन्हें दूर करने के लिए ये मंत्र बहुत मददगार सिद्ध होता है।

सुबह 4 बजे उठने के बाद स्नान करने के पश्चात महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से व्यक्ति को अच्छा फल प्राप्त होता है।

महामृत्युंजय मंत्र के जाप से लम्बी आयु और यश की प्राप्ति होती है। साथ ही मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी उत्तम होता है।

 

पूजा विधि

महामृत्युंजयमंत्र का जाप करने के लिए ब्रह्ममुहूर्त सर्वोत्तम समय है।

इस मंत्र को महामृत्युंजय यंत्र, शिवलिंग या शिव की मूर्ति के सामने ही इसका जाप करना चाहिए।

मृत्यु को टालने के लिए महामृत्युंजय मंत्र का सवा लाख बार जाप करना होता है।

महामृत्युंजय मंत्र के शुरू होने से समाप्त होने तक व्यक्ति को कुछ नियमों का पालन करना पडता है, जैसे कि मांस, मदिरा, अंडे, धूम्रपान और अन्य किसी भी प्रकार के नशे का सेवन करना मना होता है।

 

महामृत्युंजय का मंत्र

ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्‍धनान् मृत्‍योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ !!

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