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Bhaiya Dooj 2018, Puja Muhurat and Pujan Vidhi of Bhaiya Dooj
Significance of Bhaiya Dooj om swami gagan

भाईदूज का महत्व


24 February 2018
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भैया दूज

भैया दूज दीवाली के दो दिन बाद मनाया जाने वाला त्यौहार है। यह त्यौहार भाई और बहन के बीच के अटूट प्रेम का प्रतीक है। भैया दूज कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस पर्व को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। भैया दूज के दिन बहन अपने भाई को तिलक लगाकर, उसकी पूजा करती है और भाई अपनी बहन को उपहार देता है। बहन इस त्यौहार के दिन अपने भाई की लम्बी आयु की कामना करती है और भाई अपनी बहन को सुरक्षा का वचन देता है। यह त्यौहार भाई और बहन के बीच स्नेह बढाने के लिए रंक्षाबंधन त्यौहार की तरह है।

 

भैया दूज की विशेषता

भाई दूज के दिन जो भी भाई-बहन यमुना नदी में स्नान करते है, उन्हें यम का भय नहीं होता है।

इस दिन बहन अपने भाई को तिलक करके, आरती करती है और यह कामना करती है कि उनकी दीर्घ आयु हो।

इस दिन बहन अपने भाईयों के लिए खुशहाली की कामना करती है और साथ ही उनके उज्जवल भविष्य के लिए आशीष देती है।

भाई दूज का त्यौहार भाई-बहन के बीच स्नेह और विश्वास का त्यौहार है।

किसी निर्धन या ब्राह्मण को भाई दूज के दिन भोजन कराना शुभ माना जाता है।

 

दिंनाक/मुहूर्त

इस साल भैया दूज 9 नवंबर 2018 को मनाया जाएगा। साथ ही तिलक करने का शुभ मुहूर्त दोपहर 01:13 से लेकर 02:20 तक का है।

 

भैया दूज से संबंधित पूजा

इस दिन भगवान यमराज की पूजा की जाती है।

 

भैया दूज की कथा

भगवान सूर्य की पत्नी संध्या अपने पति सूर्य का तेज सहन ना कर पाने के कारण उसने अपनी छायामूर्ति का निर्माण किया और छाया को अपनी संतान यमराज और यमी को सौप कर चली गयी। छाया ने यमराज और यमी को बहुत स्नेह दिया, साथ ही दोनों भाई बहनों में बहुत स्नेह था। बड़े होने पर भी यमी अपने भाई के घर जाती और उनका सुख-दुख पूछती। यमी अपने भाई यमराज से बार-बार अपने घर आकर भोजन करने का निवदेन करती, किन्तु यमराज अपने कार्यो में व्यस्त होने के वजह से यमी के निवेदन को टालते रहे।

लेकिन एक दिन यमराज यमी के घर अचानक से आ गए। यमी ने अपने भाई यमराज को आते देख उनका स्वागत किया। साथ ही यमी ने अपने हाथों से यमराज के लिए मनपसंद पकवान बनाए और उन्हें भोजन करवाया। इससे यमराज खुश होकर यमी से एक वरदान मांगने को कहते है तो यमी यमराज से कहती है कि हर वर्ष इस दिन आपको मुझसे मिलने आना होगा और मेरी तरह जो बहन अपने भाई के साथ इस दिन यमुना में स्नान करने के बाद तिलक करके उन्हें भोजन करवाएंगी  उसे यम का भय नहीं होगा। यमराज ने यमी को तथास्तु कहकर वह वापस यमलोक लौट गये। तभी से दीवाली के दो दिन बाद भाई दूज मनाया जाता है।

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